बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की रणभूमि में तेजस्वी यादव ने महागठबंधन को एकजुट कर अपनी धाक जमाई है। राष्ट्रीय जनता दल के युवा नेता ने रणनीतिक चालों से कांग्रेस, विकासशील इंसान पार्टी, वाम दलों को साथ लाकर गठबंधन को मजबूत बनाया। क्या वे नीतीश-भाजपा की जोड़ी को हरा देंगे? राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तेजस्वी का युवा चेहरा और रोजगार के वादे विपक्ष के लिए गेम चेंजर साबित हो सकते हैं।
रणनीतिक चालें और गठबंधन मजबूती
तेजस्वी ने 2020 की हार से सबक लेते हुए संगठन को पुनर्जनन दिया। उन्होंने जातिगत समीकरण साधते हुए यादव-मुस्लिम वोट बैंक को एकजुट किया, साथ ही युवाओं को नौकरी का लालच देकर अपील बढ़ाई। महागठबंधन में राजद को प्रमुख स्थान देकर कांग्रेस को 50 सीटें, वीआईपी को 15 और वाम दलों को 20-25 सीटें दीं। तेजस्वी ने कहा, हम बिहार के हर घर में रोजगार पहुंचाएंगे, जो एनडीए के विकास मॉडल को चुनौती देगा। 2023 के जातिगत जनगणना सर्वे से मिले आंकड़ों का फायदा उठाते हुए उन्होंने सामाजिक न्याय का नारा दिया।
महागठबंधन में धाक का राज
तेजस्वी की चालाकी ने गठबंधन के आंतरिक कलह को दबाया। कांग्रेस के साथ सीट बंटवारे पर विवाद सुलझाने के लिए उन्होंने अशोक गहलोत जैसे नेताओं को मनाया। वीआईपी प्रमुख मुकेश साहनी को उपमुख्यमंत्री का संकेत देकर निषाद वोट साधा। वाम दलों को मजबूत सीटें देकर मजदूर वर्ग को लुभाया। राजनीतिक विश्लेषक बोले, तेजस्वी ने 2020 में 75 सीटें जीतकर साबित किया कि वे विपक्ष के चेहरा हैं। अब 243 सीटों में से 150 का लक्ष्य रखा है।
चुनावी समर में गदर की संभावना
एनडीए के 200 सीटों के दावे के बीच तेजस्वी की रैलियां युवाओं को लामबंद कर रही हैं। प्रवासी बिहारियों का मुद्दा उठाकर उन्होंने पलायन पर सरकार को घेरा। पहले चरण का मतदान 6 नवंबर को, नतीजे 14 नवंबर को। जानकार कहते हैं, अगर मुस्लिम-यादव-दलित गठजोड़ मजबूत रहा, तो तेजस्वी सरकार बना सकते हैं। लेकिन एनडीए की एकजुटता और मोदी-नीतीश की जोड़ी चुनौती है। क्या तेजस्वी गदर मचाएंगे? वोट ही फैसला करेंगे।
